सुरभि सेवा
गिर

चित्र: सुरभि सेवा, हिंदी पाठक संस्करण का आवरण

भारतीय गोवंश

गिर गोवंश

गिर वन क्षेत्र, सौराष्ट्र, गुजरात

गिर गाय गुजरात के सौराष्ट्र में गिर वन क्षेत्र की दुधारू नस्ल है। पहचान: उभरा हुआ माथा, लंबे लटकते कान, और औसत दूध प्रति ब्यांत 1,500 से 2,000 किलो।

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नस्लगिर
क्षेत्रगिर वन क्षेत्र, सौराष्ट्र, गुजरात
प्रकारदुधारू
मूल स्रोतबॉम्बे प्रेसीडेंसी के भारतीय गोवंश
लेखकके. ह्यूलेट
प्रकाशन वर्ष1912
संस्करणहिंदी पाठक संस्करण
पुस्तिका पृष्ठ9

संक्षिप्त परिचय

उभरा हुआ माथा, लंबे लटकते कान और पीछे मुड़े सींग। भारत की सबसे प्रसिद्ध दुधारू देशी नस्ल।

पहचान

गिर गाय का माथा उभरा हुआ और चौड़ा होता है। कान लंबे, पत्ते जैसे लटके हुए। सींग पीछे और नीचे की ओर मुड़े हुए। रंग लाल से लेकर सफेद पर लाल-भूरे धब्बों तक।

उत्पत्ति

गिर वन और उसके आसपास के जिले: जूनागढ़, भावनगर, राजकोट और अमरेली। गिर सांड को ब्राज़ील ले जाया गया, जहाँ आज गिर और होल्स्टीन नस्लों के संकरण से बनी “गिरोलांडो” गाय बड़े दुग्ध उद्योग का आधार है।

विशेषताएँ

  • गर्मी सहने की क्षमता अधिक
  • रोग प्रतिरोधक
  • औसत दुग्ध उत्पादन प्रति ब्यांत 1,500 से 2,000 किलो, अच्छे झुंड में इससे अधिक

स्रोत: राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR), करनाल। नस्ल विवरण पंजी।

पुस्तिका पढ़ें

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स्रोत एवं संदर्भ

मूल स्रोत:
Breeds of Indian Cattle, Bombay Presidency, K. Hewlett, M.R.C.V.S., 1912। पुस्तकालय में पढ़ें

आवश्यक सूचना

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