
भारत में गोवंश की दशा
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| लेखक | नीलानंद चटर्जी |
|---|---|
| भूमिका | सर जॉन जी. वुडरॉफ़ |
| प्रकाशन वर्ष | 1926 |
| प्रकाशक | अखिल भारतीय गौ सम्मेलन संघ |
| प्रकाशन स्थान | कलकत्ता |
| संस्करण | मूल अंग्रेज़ी संस्करण |
| PDF में पृष्ठ | 724 |
| विषय | चित्र, प्रांतीय रिपोर्टें, सांख्यिकीय तालिकाएँ और परिशिष्ट |
संक्षिप्त परिचय
1926 में प्रकाशित यह ऐतिहासिक पुस्तक भारत में गोवंश की तत्कालीन स्थिति और उसकी गुणवत्ता में गिरावट के कारणों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें गोवंश की संख्या, नस्लों, पालन-पोषण, प्रजनन, उपयोगिता, दूध उत्पादन और कृषि में उसकी भूमिका से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी संकलित की गई है।
पुस्तक में चरागाहों की कमी, चारे की समस्या, अनुपयुक्त प्रजनन, अच्छे सांडों की अनुपलब्धता, पशु रोग, अकाल, पशु-चिकित्सा व्यवस्था, गोवंश के निर्यात और उपयोगी पशुओं के वध जैसे विषयों पर सरकारी रिपोर्टों, जिला गजेटियरों और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर विचार किया गया है। इसमें विभिन्न प्रांतों और जिलों में गोवंश की स्थिति का विवरण तथा सुधार के लिए सुझाए गए उपाय भी दिए गए हैं।
भारत में गोवंश की ऐतिहासिक स्थिति, उसके पतन के कारणों और तत्कालीन सुधार प्रयासों को समझने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण मूल स्रोत है।
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स्रोत एवं संदर्भ
मूल ग्रंथ का संदर्भ:
Chatterjee, Nilananda. (1926). The Condition of Cattle in India: Being an Enquiry into the Causes of the Present Deterioration of Cattle with Suggestions for Their Remedy. With an Introduction by Sir John G. Woodroffe. Calcutta: All India Cow Conference Association.
PDF प्राप्ति स्रोत: Internet Archive, Digital Library of India
आवश्यक सूचना
यह पुस्तक अपने मूल अंग्रेज़ी स्वरूप में प्रस्तुत की गई है। सुरभि सेवा ने इसकी मूल विषयवस्तु में कोई परिवर्तन नहीं किया है और इसके कॉपीराइट अथवा स्वामित्व का कोई दावा नहीं करती। पुस्तक में प्रयुक्त भाषा, विचार और विवरण उसके मूल प्रकाशन काल से संबंधित हैं।