
मैसूर के गोवंश पर टिप्पणी
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| लेखक | ए. कृष्णसामी अयंगर और कैप्टन एच. टी. पीज़ |
|---|---|
| प्रकाशन वर्ष | 1912 |
| प्रकाशक | सरकारी मुद्रण अधीक्षक, भारत |
| प्रकाशन स्थान | कलकत्ता |
| संस्करण | मूल अंग्रेज़ी संस्करण |
| PDF में पृष्ठ | 83 |
| विषय | छायाचित्र, नस्ल विवरण और तालिकाएँ |
संक्षिप्त परिचय
1912 में प्रकाशित यह ऐतिहासिक पुस्तक तत्कालीन मैसूर राज्य के गोवंश, पशुपालन व्यवस्था और प्रजनन परंपराओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें अमृत महल, हल्लीकर, चित्रदुर्ग और महादेश्वर बेट्टा सहित विभिन्न क्षेत्रीय गोवंश नस्लों की पहचान, शारीरिक विशेषताओं, उपयोगिता और प्रजनन क्षेत्रों की जानकारी दी गई है।
पुस्तक में पशुओं के चयन, प्रजनन योग्य सांडों, बधियाकरण, चरागाह, चारे, पशु मेलों और पारंपरिक नस्ल-सुधार पद्धतियों का भी वर्णन किया गया है। मैसूर के गोवंश और उसकी ऐतिहासिक पशुपालन व्यवस्था के अध्ययन के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण मूल स्रोत है।
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स्रोत एवं संदर्भ
मूल ग्रंथ का संदर्भ:
Kristnasamiengar, A., and Pease, H. T. (1912). Note on the Cattle of Mysore. Calcutta: Superintendent Government Printing, India.
PDF प्राप्ति स्रोत: Rare Book Society of India
आवश्यक सूचना
यह पुस्तक अपने मूल अंग्रेज़ी स्वरूप में प्रस्तुत की गई है। सुरभि सेवा ने इसकी मूल विषयवस्तु में कोई परिवर्तन नहीं किया है और इसके कॉपीराइट अथवा स्वामित्व का कोई दावा नहीं करती। पुस्तक में प्रयुक्त भाषा, विचार और विवरण उसके मूल प्रकाशन काल से संबंधित हैं।